पटियाला में निहंगों के हमले से बुरी तरह जख्मी एएसआई हरजीत सिंह का हाथ चंडीगढ़ पीजीआई की डॉक्टरों की टीम ने जोड़ दिया है। डॉक्टरों की जिस टीम ने एएसआई का हाथ जोड़ा है, उसमें मध्य प्रदेश के गुना ज़िले के डॉ. मयंक मंगल भी शामिल थे। डॉ. मयंक पीजीआई में सीनियर रेजीडेंट डॉक्टर हैं। उन पर पूरा प्रदेश गर्व कर रहा है। दैनिक भास्कर से फोन पर बातचीत में मयंक ने कहा, "ये मेरे लिए लाइफटाइम अचीवमेंट जैसा हो गया है। मयंक ने कहा कि ऐसे ऑपरेशन हमने पहले भी किए हैं, लेकिन ये ऑपरेशन हमारे लिए चुनौती की तरह था। हमारी टीम ने इसे सफलतापूर्वक किया है।" मयंक ने कहा कि 5 दिन का बाद इसका रिजल्ट सामने आएगा, हमें देखना होगा कि इसकी रिकवरी कितनी रफ्तार से होती है।
मेरे पास अपनी जन्मभूमि के लिए प्लान है
डॉ. मयंक ने गुना के मॉडर्न स्कूल से पढ़ाई की है। वह कहते हैं कि मैंने गुना में पढ़ाई की, यहीं पला-बढ़ा। अब इस लायक बन गया हूं तो गुना के लिए कुछ सोच रहा हूं और वह अभी मेरे मन में है। वहां पर भी सर्जरी को लेकर तमाम समस्याएं हैं। इसे दूर करने की कोशिश करूंगा। गुना मेरा जन्मभूमि है मैं वहां पर जरूर कुछ करना चाहूंगा। मयंक मंगल के भाई और पेशे से इंजीनियर नीतेश मंगल ने बताया कि भइया की स्कूल एजुकेशन गुना से हुई है। इसके बाद वह मेडिकल की पढ़ाई के लिए कोयंबटूर मेडिकल कॉलेज चले गए। वहां से कोर्स करके अब वह चंडीगढ़ पीजीआई से प्लास्टिक सर्जरी में स्पेशालाइजेशन कर रहे हैं। इसके पहले वह जनरल सर्जरी में पोस्ट ग्रेजुएट हैं।
रविवार को कर्फ्यू पास मांगने पर भड़क गए थे निहंग
रविवार को पटियाला में कर्फ्यू पास मांगने पर निहंग भड़क उठे थे। उन्होंने पुलिस टीम पर हमला कर एएसआई हरजीत सिंह का हाथ काट दिया था। इसके बाद हरजीत सिंह को चंडीगढ़ पीजीआई रेफर कर दिया गया था। यहां पर उनके हाथ को जोड़ने के लिए ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन करीब साढ़े सात घंटे चला। 9 डॉक्टर्स की टीम और 3 स्टाफ नर्स ने एक चैलेंज के साथ ये जटिल ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। इस टीम में गुना के रहने वाले डॉ. मयंक मंगल भी शामिल थे।
सूचना मिलते ही डॉक्टरों की टीम तैयार की गई
निहंगों के हमले में एक पुलिस अधिकारी का पीजीआई चंडीगढ़ फोन आया कि पटियाला में जख्मी एएसआई हरजीत सिंह को ट्रीटमेंट के लिए पीजीआई भेजा जा रहा है। पुलिस अधिकारियो ने डॉक्टर्स को बताया कि हमले में एएसआई का हाथ कट गया है। पीजीआई में इस कठिन टॉस्क के लिए डॉक्टरों की एक टीम बनाई गई।
आसान नहीं था ऑपरेशन
ऑपरेशन के लिए एएसआई हरजीत सिंह को ऑपरेशन थियेटर में लाया गया। वहां मरीज के हाथ की जांच के बाद बड़ी सावधानी पूर्वक हाथ की नसों को जोड़ा गय। सुबह करीब 10 बजे शुरू हुआ ऑपरेशन शाम साढ़े पांच बजे पूरा हुआ। यानी पूरे साढ़े सात घंटे। टीम के डॉक्टर्स ने कहा- ऑपरेशन सक्सेसफुल। डॉक्टर्स की टीम ने सफलतापूर्वक कटे हाथ को जोड़ दिया था।डॉक्टरों विश्वास है कि कुछ दिन बाद जुड़ा हुआ हाथ अच्छे से काम करना शुरू कर देगा।