दैनिक भास्कर से फोन पर बातचीत में अंकुश ने बताया कि लगता है कि फिर से दो हफ्ते के लिए यहां और फंस गया हूं, लेकिन उम्मीद है कि जल्द घर आऊंगा। क्वारैंटाइन सेंटर में अंकुश डे का दो बार कोरोना टेस्ट के लिए सैंपल लिया गया है, दोनों रिपोर्ट निगेटिव आई हैं। राजधानी के भवानी नगर इंद्रपुरी निवासी अंकुश डे ने अपने लॉकडाउन में फंसने की पूरी घटना बताई।
अचानक लॉकडाउन हुआ और पांच दिन एयरपोर्ट पर फंसे रहे अंकुश
अंकुश डे ने बताया- "मैं दो हफ्ते के टूरिस्ट वीजा पर कुआलालंपुर गया था। इस दौरान कोरोनावायरस का संक्रमण बढ़ रहा था और मलेशिया सरकार ने 18 मार्च को लॉकडाउन करने की घोषणा कर दी। मैंने फ्लाइट के लिए अपना चेक इन, इमीग्रेशन, सुरक्षा और गेट पास करके जिस फ्लाइट में चढ़ा था, उस पर अपना चेक इन किया, लेकिन बोर्डिंग के दौरान मुझे मना कर दिया गया क्योंकि उन्हें भारत सरकार से निर्देश मिले थे कि किसी को भी मलेशिया से भारत जाने की अनुमति नहीं है। इसकी वजह से मैं 5 दिनों तक एयरपोर्ट में ही फंसा रहा।"
कुआलालंपुर एयरपोर्ट की बेंच पर गुजारीं 4 रातें
अंकुश ने बताया- हमें भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने हमें बताया कि सभी भारतीयों को एयरलिफ्ट करके इंडिया ले जाया जाएगा। इस दौरान जितने भारतीय थे, सभी लोग एयरपोर्ट में फंस गए। किसी को भी बाहर नहीं निकलने दिया गया। पांच दिन तक हम एयरपोर्ट पर ही रुके रहे। दिन में भारतीय दूतावास से हमें भोजन की व्यवस्था हो जाती थी और रात में सोने के लिए एयरपोर्ट की बेंच थीं। ऐसे करके हमने पांच दिन गुजारे।"
23 मार्च की रात को एयरलिफ्ट करके चेन्नई लाया गया
अंकुश डे ने बताया- "कुआलालंपुर एयरपोर्ट पर पांच दिन काटने के बाद आखिर वह दिन आ गया, जब हम अपने देश के लिए रवाना होंगे। मैं खुश था कि चलो घर पहुंच जाएंगे, लेकिन मुसीबतें अभी शुरू होने वाली थीं। 23 मार्च की रात को हम लगभग 110 भारतीयों को एयर एशिया की चेन्नई जाने वाली फ्लाइट से एयरलिफ्ट कर चेन्नई लाया गया। यहां सभी को क्वारैंटाइन सेंटर में रखा गया। दो बार मेरा कोविड-19 का टेस्ट लिया गया, लेकिन वह निगेटिव रहा। यहां पर हमारे पास बहुत बुनियादी सुविधाएं हैं। बहुत खराब इंटरनेट कनेक्शन है। अब हमें लगता है कि हम 2 और हफ्तों के लिए यहां फंस गए हैं, उम्मीद है कि इसके बाद सरकार हमें घर वापस जाने के लिए हरी झंडी देगी।"